बारिश में तालाब बन जाता है सकोला स्कूल परिसर, छात्राओं को आवागमन में भारी परेशानी

बारिश में तालाब बन जाता है सकोला स्कूल परिसर, छात्राओं को आवागमन में भारी परेशानी
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। सकोला तहसील मुख्यालय में वीरांगना रानी दुर्गावती तिराहे पर स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मिडिल स्कूल एवं प्राइमरी स्कूल का परिसर बारिश के दिनों में तालाब में तब्दील हो जाता है। इससे आंगनबाड़ी केंद्र से लेकर हायर सेकेंडरी तक पढ़ने वाले बच्चों और छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अमन शर्मा जिलाध्यक्ष युवा कांग्रेस

बस स्टैंड का पानी भरता स्कूल परिसर में
स्थानीय लोगों के अनुसार, कोटमी बस स्टैंड का पानी बिना किसी निकासी व्यवस्था के सीधे स्कूल परिसर में जमा हो जाता है। रानी दुर्गावती तिराहे और शासकीय राशन दुकान तक कहीं भी नाली नहीं बनाई गई है, जिसके कारण बारिश का पानी और आसपास का उपयोग का गंदा पानी स्कूल परिसर में बहकर आ जाता है।
छात्राओं की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर असर
विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि बारिश के दिनों में छात्राएं एवं छोटे बच्चे जलभराव में गिरते-पड़ते स्कूल आते हैं। इससे उनके पैर में संक्रमण का खतरा बना रहता है। कई बार बच्चे पानी से बचने के चक्कर में गिरकर चोटिल भी हो जाते हैं। छात्राओं को स्कूल आने-जाने में अत्यधिक दिक्कत होती है, जिससे उनकी उपस्थिति भी प्रभावित होती है।
समाधान के लिए नहीं उठाए गए कदम
शिक्षकों और अभिभावकों ने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है, परंतु अब तक इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। स्कूल में जलभराव से शौचालय तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है, जिससे बच्चियों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है।
जल्द नाली निर्माण की आवश्यकता
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि बस स्टैंड कोटमी से रानी दुर्गावती तिराहा और शासकीय राशन दुकान तक जल्द से जल्द नाली निर्माण कराया जाए, जिससे बारिश का पानी स्कूल परिसर में न जाकर बाहर निकले और बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर संकट न आए।
यदि समय रहते प्रशासन द्वारा नाली निर्माण और जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो छात्राओं की उपस्थिति के साथ उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य पर भी बड़ा खतरा बना रहेगा। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि समस्या का निराकरण नहीं होने पर वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।





